मार्च के आखिरी दिनों से शुरू हुआ मौसम का मिजाज अब उत्तर भारत के लिए मुसीबत बन गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी थी कि ईरान से उठने वाला एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) भारत की ओर बढ़ रहा है, और सच में ऐसा ही हुआ। इस मौसम प्रणाली ने न केवल तापमान को ऊपर-नीचे किया, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में खड़ी फसलों को तबाह कर दिया है। 7 और 8 अप्रैल, 2026 को जब दो प्रणालियां एक साथ सक्रिय हुईं, तो हालात और बिगड़ गए, जिससे करीब 13 राज्यों में भारी बारिश, ओले और तेज हवाओं का दौर चला।
बदलता मौसम और तापमान का उतार-चढ़ाव
कहते हैं कि मौसम का कोई भरोसा नहीं होता, और कानपुर के हालात इसका जीता-जागता सबूत हैं। 28 मार्च को जहां कानपुर में कड़क धूप खिली थी और अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा था (जो सामान्य से 1.4 डिग्री ज्यादा था), वहीं अगले ही दिन ईरान से आए नए विक्षोभ ने सब कुछ बदल दिया। हवाओं की दिशा उत्तर-पश्चिम से बदलकर दक्षिण-पूर्व हो गई और नमी का स्तर गिरकर महज 29 प्रतिशत तक पहुंच गया।
लेकिन असली खेल तब शुरू हुआ जब अप्रैल के पहले हफ्ते में कश्मीर में लगातार बर्फबारी हुई। इस वजह से मैदानी इलाकों में भी ठंडक बनी रही। यह स्थिति काफी अजीब थी क्योंकि आमतौर पर मार्च के अंत तक गर्मी बढ़ने लगती है, लेकिन इस बार प्रकृति ने अपना अलग ही रास्ता चुना। (शायद इसीलिए किसानों को उम्मीद थी कि मौसम सामान्य रहेगा, लेकिन वह गलत साबित हुए)।
दोहरे विक्षोभ का कहर: फसलों पर टूटे ओले
सबसे ज्यादा तबाही 7 और 8 अप्रैल, 2026 के बीच देखी गई। इस समय उत्तर-पश्चिम भारत में एक नहीं, बल्कि दो पश्चिमी विक्षोभ एक साथ सक्रिय थे। इसका असर ऐसा था कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में चार दिनों तक लगातार तूफान, बारिश और ओले पड़ते रहे। उत्तर प्रदेश के कानपुर, लखनऊ और उन्नाव जैसे जिलों में किसानों की मेहनत मिट्टी में मिल गई।
IMD ने 12 जिलों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया था, जिसमें सहारनपुर, अलीगढ़, बुलंदशहर और झांसी जैसे इलाके शामिल थे। यहां हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई, जो किसी छोटे तूफान से कम नहीं थी। अजय मिश्रा, जो चंद्र शेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में कृषि मौसम तकनीकी अधिकारी हैं, ने बताया कि इस तरह के तेज तूफान और ओलावृष्टि ने फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
दिल्ली-NCR और उत्तराखंड में क्या रहा असर?
राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में भी पिछले कई दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही थी। 7 अप्रैल को 30-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने बिजली की सप्लाई बाधित कर दी और कई जगहों पर पेड़ गिर गए। वहीं, उत्तराखंड के पहाड़ों पर स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण थी। उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जैसे इलाकों में 72 घंटों तक खराब मौसम रहा।
दिलचस्प बात यह है कि 3,300 मीटर से अधिक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी भी दर्ज की गई। बिजली गिरने और तेज हवाओं ने वहां के स्थानीय जीवन को पूरी तरह प्रभावित किया। यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि कैसे एक छोटा सा बदलाव, जो हजारों किलोमीटर दूर ईरान में शुरू हुआ, भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह की तबाही लाया।
राहत की उम्मीद और भविष्य का अनुमान
अब अच्छी खबर यह है कि 9 और 10 अप्रैल तक ये विक्षोभ कमजोर होने लगे हैं। स्काईमेट (Skymet) की रिपोर्ट के मुताबिक, अब इसका असर केवल पहाड़ों पर हल्की बारिश के रूप में सिमट गया है। उत्तर-मध्य और पूर्वी भारत में तापमान में 8 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि होने की संभावना है, जिससे लोगों को ठंड से राहत मिलेगी।
हालांकि, उत्तर-पूर्वी राज्यों में अगले 5 दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश जारी रह सकती है। 11 अप्रैल के बाद उत्तर-पश्चिमी हवाएं फिर से चलेंगी, जो शुरुआत में ठंडी होंगी लेकिन धीरे-धीरे गर्मी वापस लौटेगी। कश्मीर और पाकिस्तान के गिलगित-मुजफ्फराबाद इलाकों में अब भी हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है।
मुख्य तथ्य एक नजर में
- प्रभावित राज्य: उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड सहित 13 राज्य।
- हवा की अधिकतम रफ्तार: उत्तर प्रदेश में 60 किमी/घंटा और दिल्ली में 50 किमी/घंटा।
- तापमान परिवर्तन: उत्तर-मध्य भारत में 8 डिग्री सेल्सियस तक की संभावित वृद्धि।
- क्रिटिकल डेट्स: 7-8 अप्रैल को विक्षोभ अपने चरम पर था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) क्या होता है और यह ईरान से कैसे आया?
पश्चिमी विक्षोभ एक गैर-मानसूनी दबाव प्रणाली है जो भूमध्य सागर और ईरान जैसे क्षेत्रों से उत्पन्न होती है। यह ठंडी हवाओं और नमी को भारत के उत्तरी मैदानी इलाकों की ओर ले जाती है, जिससे सर्दियों और वसंत ऋतु में अचानक बारिश और बर्फबारी होती है। इस बार यह ईरान के उत्तरी हिस्से से शुरू होकर भारत पहुंचा।
किसानों पर इसका सबसे ज्यादा असर क्यों पड़ा?
अप्रैल का समय फसलों की कटाई और परिपक्वता का होता है। जब 7-8 अप्रैल को भारी ओले और 60 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाएं चलीं, तो खड़ी फसलें जमीन पर लेट गईं या टूट गईं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार के जिलों में फसल बर्बादी की खबरें आई हैं।
क्या अब बारिश पूरी तरह रुक गई है?
पूरी तरह नहीं। हालांकि मुख्य विक्षोभ कमजोर हो चुका है, लेकिन उत्तर-पूर्वी राज्यों में अभी भी 5 दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। साथ ही, कश्मीर और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश जारी रह सकती है।
तापमान में अचानक वृद्धि का क्या कारण है?
जैसे ही पश्चिमी विक्षोभ का सिस्टम कमजोर होकर विदा होता है, उत्तर-पश्चिमी हवाएं अपना प्रभाव बदलती हैं। सिस्टम के हटने से आसमान साफ हो जाता है और सूरज की रोशनी सीधे जमीन पर पड़ती है, जिससे तापमान में 8 डिग्री तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है।